वी शांताराम और लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल :: जल बिन मछली नृत्य बिन बिजली :: कलात्मक “क्लासिक”
वी शांताराम और लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल :: जल बिन मछली नृत्य बिन बिजली :: कलात्मक “क्लासिक”
दिग्गज अभिनेता, निर्माता-निर्देशक, दादा साहब फाल्के पुरस्कार विजेता वी. शांताराम के साथ काम करना गौरव की बात हुआ करती थी। वे प्रतिभा के बड़े पारखी थे। अपनी फिल्मों के संगीत के प्रति उनमें असाधारण संवेदनशीलता थी। वी. शांताराम फिल्म के गाने और संगीत की गुणवत्ता अद्वितीय और विशेष हुआ करती थी। संगीत उनकी फिल्मों के लिए एक अत्यंत महत्व का अंग हुआ करता था।
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| Laxmikant, V. Shantaram, Lata Mangeshkar, Majrooh & Pyarelal |
वी शांताराम कैंप में प्रवेश करना आसान काम नहीं था। उनके पास संगीत निर्देशकों की अपनी पसंद थी जो 2 से 3 तक सीमित थी। चालीस, पचास, साठ और सत्तर के दशक के संगीत निर्देशकों के कई बड़े नामों को, सी रामचंद्र और वसंत देसाई को छोड़कर वी शांताराम के साथ काम करने का मौका नहीं मिल सका.
1970 में लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल को वी शांताराम की "क्लासिक" फिल्म "जल बीन मछली नृत्य बीन बिजली" के लिए पहली और आखिरी बार काम करने का मौका मिला। लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल के लिए यह समीक्षकों द्वारा प्रशंसित निर्देशक के साथ काम करने का अवसर था - और अब तक के नए क्षेत्र में अपना कौशल दिखाने का अवसर था - एक नृत्य संगीत नतीजा शानदार रहा।
हालांकि "जल बिन मछली नृत्य बिन बिजली" वी शांताराम के बड़े बैनर के तहत बनाई गई थी, लेकिन इसमें अज्ञात/अलोकप्रिय अभिनेता/अभिनेत्री हैं। अभिनेत्री, संध्या, अभिजीत, वत्सला देशमुख, इफ्तेखार और राजा परांजपे द्वारा प्रदर्शन किया गया। यह एक नॉन-स्टारकास्ट फिल्म थी। वी शांताराम ने अतीत में कई यादगार संगीतमय हिट फिल्में बनाई हैं, जिनमें फिल्म में कोई स्टार नहीं है।
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| Pyarelal, Lata Mangeshkar, Sandhya, V Shantaram & Laxmikant |
भव्य रूप से बनाई गई फिल्म में कई शानदार नृत्य शामिल हैं। अभिनेत्री / नर्तकी संध्या / ने इसे शानदार तरीके से प्रस्तुत किया है
वी. शांताराम अपनी फिल्म के लिए कुछ नया करते थे। इस बार पहली बार हिंदी फिल्म संगीत के लिए इस फिल्म के सभी गाने "स्टीरियोफोनिक साउंड सिस्टम" में रिकॉर्ड किए गए थे।
लता मंगेशकर ने मुकेश के साथ दो युगल गीतों के अलावा चार एकल गाने गाए हैं। मुकेश ने एक गाना गाया है जो बेहद हिट रहा।
1) मन की प्यास मेरे मन से ... लता मंगेशकर
संतूर और बाँसुरी का 28 सेकंड का "प्रील्यूड" / शुरुआत का संगीत, मन को मोह लेने वाला है। इस गीत में कम से कम वाद्य यंत्रों का प्रयोग किया है ।पूरा गीत बांसुरी (पं. हरिप्रसाद चौरसिया) और संतूर (पं. शिवकुमार शर्मा) की झलको से के इर्द-गिर्द बुना गया है। उत्कृष्ट "ढोलक"/"तबला' की ताल।
2) कजरा लगा के रे बिंदिया..लता मंगेशकर
गीत की रचना का अनोखा तरीका (जैसा कि लिविंग लीजेंड प्यारेलाल जी द्वारा सुनाया गया है)
वी. शांताराम की पत्नी, संध्या, अभिनेत्री, नर्तकी और अनुभवी नृत्य - रचनाकार ने संगीतकार लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल को कहा की :: उनके डांसिंग स्टेप्स देखकर ताल (rhythm), लय और ढोलक का ठेका बनाये। और दादासाहेब फाल्के पुरस्कार विजेता, गीतकार मजरूह सुल्तानपुरी को कहा की :: चेहरे के भावों को देखकर शब्द लिखे। ..... काफी प्रैक्टिस और अभ्यास। ......... और ८ से १० घंटोमें गाना तैयार
यह मधुर गीत "मयूर नृत्य" पर है । अलग शैली की रचना, पश्चिमी शैली में बांसुरी का प्रयोग प्रमुखतासे किया है। शायद सबसे लंबा "प्रील्यूड" / शुरुआत का संगीत , 3 मिनट और 27 सेकंड । ढोलक की विभिन्न रीधम, पश्चिमी शैली का ऑर्केस्ट्रा में बांसुरी और संतूर, वायलिन, वायोला और गिटार का प्रमुख रूप से उपयोग किया है। साथ ही गाने का "पोस्टलूड"/ बाद का संगीत और "मयूर डांस" सुनना न भूलें।
शानदार ऑर्केस्ट्रेशन। ""चर्च बेल" और लता मंगेशकर की आवाज के साथ खूबसूरत तालमेल बिठाया है ! दूसरे "इंटरल्यूड" में सिम्फनी वायलिनस के साथ "चर्च बेल" का ओवरलैपिंग साउंड इफेक्ट सुनने लायक है। मत भूलिए कि अभिनेत्री संध्या ने इस खूबसूरत गाने पर एक पैर से डांस किया है।
4) जो मैं चली फिर न मिलूंगी….लता मंगेशकर।
मधुर गीत बिल्कुल अलग धुन, बहोत बढियाँ इको गूंज ध्वनि का प्रभाव। लता मंगेशकर गायकी की स्टाइल और लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल का भारी ऑर्केस्ट्रा, एक दूसरे से मेल खाता हुआ.
5) बात है एक बून्द सी ...... लता मंगेशकर और मुकेश
एक और अलग किस्म का गीत. सुननेमें एक साधारण सा लगनेवाला गीत लेकिन बहोत मधुरता गाना। गाने की खूबी है 'इंटरल्यूड'। यह सितार, वीणा और गिटार से भरा है। सुंदर स्टीरियोफोनिक प्रभाव।लताजी और मुकेश जी की गुनगुनाहट संगीत प्रेमियों को मंत्रमुग्ध करती है।
6) तारोने सज के……मुकेश
एक बार फिर शानदार और बड़े पैमाने पर ऑर्केस्ट्रा। इंटरल्यूड, प्रील्यूड और पोस्टल्यूड मनमोहक है। ऑर्केस्ट्रा में वायलिन, वायोला, गिटार और फ्रेंच हॉर्न सुनने लायक हैं। बोंगो ड्रम "लय" मंत्रमुग्ध कर देने वाला है। मुकेश द्वारा गाया गया बहुत ही मधुर गीत। । गाने में अभिनेत्री संध्या का सुंदर फिल्मांकन और प्यारा नृत्य है।
7) झूम के गए ऐ दिल।।। लता मंगेशकर और मुकेश
माधुर्य के साथ लोक शैली की रचना। "प्रस्तावना" / "अंतराल" घुघरू की ध्वनि से भरे हुए है। साथ ही कोरस बस सर्वश्रेष्ठ हैं।
अजय पौण्डरिक
वड़ोदरा
9879554755




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